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लेखनी कहानी -22-Aug-2024

प्यार में जब तू मेरी जान मगन होती है। देख कर तेरी सहेली को जलन होती है।

अब अकेले में सताती हैं तेरी सब यादें। अब तो तन्हाई से कमरे में घुटन होती है।

ऐसे मदहोश किया यार तेरी आंखों ने। होश में आने की कोई न जतन होती है।

बड़ी अफसुर्दगी होती है यहां बेटी को। कभी वालिद के जो माथे पे शिकन होती है।

भूखे बच्चों का मुझे पेट है भरना दानिश। इसलिए अब नहीं पैरों में थकन होती है।

Danish sagheer ahmad siddiqui Bahraich

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